लखनऊ/ शुक्रवार, २२ अक्‍तूबर/ गंभीर थी गर्भवती, प्रसव के बाद थम गई धड़कन, डॉक्टरों ने बचा ली जिंदगी

लखनऊ। केजीएमयू में अति गंभीर हालत में भर्ती हुई गर्भवती को डॉक्टरों ने नई जिंदगी दी। सीवियर प्रीएकलम्पसिया से ग्रस्त मरीज का बीपी बहुत कम हो गया था। इससे शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगी थी और गर्भस्थ बच्चों की भी जान का खतरा पैदा हो गया था। चिकित्सकों ने इमरजेंसी में सिजेरियन प्रसव कराया और महिला ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया। इसके बाद आईसीयू में पहुंची तो हार्ट ने काम करना बंद कर दिया। जांच में पता चला कि दिल के आसपास पानी भर गया है। इसके बाद आधा घंटे तक सीपीआर देकर उसकी जान बचाई गई।

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क्वीन मेरी अस्पताल में गत 10 अक्तूबर को चेकअप के लिए गर्भवती सोनू वर्मा (22) आई थी। डॉक्टरों ने जांच की तो उसकी रिपोर्ट गड़बड़ मिली। इस पर उसे भर्ती कर लिया। रात में उसकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। डॉ. मंजुलता ने रात में प्रसव कराया तो उसे जुड़वा बच्चे हुए। डिलीवरी के बाद बीपी कम होने के साथ उसके हार्ट ने भी काम करना बंद कर दिया। ब्लड प्रेशर कम होने और शरीर में ऑक्सीजन की कमी से मरीज को वेंटिलेटर पर एनेस्थीसिया की आईसीयू-2 में शिफ्ट किया गया। वहां पहुंचने पर अल्ट्रासाउंड करके देखा गया तो पता चला कि हार्ट के चारों तरफ पानी भरा हुआ है। इसे पेरीकॉर्डियल इफ्यूजन होलते हैं। इसकी इसकी वजह से बीपी बहुत कम हो जाने से हार्ट रुक गया था। हार्ट को सीपीआर देकर शुरू कराया गया और हार्ट से पानी निकाला गया। धीरे धीरे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगा। शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा भी बढ़ने लगी। किडनी भी काम करने लगी। प्रसूता को तीसरे दिन वेंटिलेटर से बाहर निकाला गया। हाई फ्लो ऑक्सीजन मशीन पर रखा गया। गुरुवार को महिला की हालत में सुधार हो गया। अब उसे डिस्चार्ज करने की तैयारी हो रही है।
इन डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई
महिला को नई जिंदगी देने में डॉ. विपिन सिंह, डॉ. बीबी कुशवाहा, डॉ प्रज्ञा, डॉ. तेजश्री, डॉ. सुमेधा, डॉ. कुलदीप, डॉ. कनिका, डॉ. तृप्ति, डॉ. आयुषी पांडेय, डॉ. अस्मिता, वार्ड मास्टर हरेराम, नर्सिंग स्टाफ राकेश आदि का सहयोग रहा।

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