गोरखपुर/ गुरुवार, २५ नवंबर/ गोरखपुर महिला अस्पताल: बाल रोग विशेषज्ञ को किया गया रिलीव, कार्यवाहक एसआईसी की ओर से की गई कार्रवाई

गोरखपुर महिला अस्पताल में डॉक्टरों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। अस्पताल की एसआईसी डॉ. नीना त्रिपाठी ने बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अजय शंकर देवकुलियार को बुधवार को रिलीव कर दिया है। वह चार साल से महिला अस्पताल में अटैच थे। उन्हें एसएनसीयू का प्रभारी बनाया गया था।

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बताया जाता है कि एसआईसी डॉ. नीना त्रिपाठी के पति डॉ. एके त्रिपाठी से बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. देवकुलियार का विवाद पहले हो चुका है। तीन दिन पहले ही बाल रोग विशेषज्ञ ने एडी हेल्थ डॉ. रमेश गोयल के पास अस्पताल में उत्पीड़न की शिकायत की थी। आरोप लगाया था कि अस्पताल की एसआईसी व उनके पति उत्पीड़न कर रहे हैं। शिकायत के बाद एडी हेल्थ ने मामले की जांच शुरू कर दी थी। गुरुवार को बाल रोग विशेषज्ञ को एडी हेल्थ के कार्यालय में बयान दर्ज कराना है। इतना ही नहीं, उन्हें उत्पीड़न के साक्ष्य प्रस्तुत करने हैं। इससे पहले ही अस्पताल प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई कर दी है। इस मामले में बाल रोग विशेषज्ञ ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। कहा कि मामला आला अधिकारियों के संज्ञान में है। वे ही इस पर फैसला करेंगे।
 
डीएम तक पहुंचा मामला
महिला अस्पताल में एसआईसी से विवाद का मामला डीएम तक पहुंच गया है। बुधवार को डीएम विजय किरन आनंद ने अस्पताल के कुछ कर्मचारी व एक चिकित्सक को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली है। इस दौरान कर्मचारियों ने अस्पताल में हो रहे उत्पीड़न की जानकारी दी।
 
महिला अस्पताल की एसआईसी डॉ नीना त्रिपाठी ने बताया कि डॉ. अजय शंकर देवकुलियार सीएमओ की ओर महिला अस्पताल में अटैच किए गए थे। उनकी कार्य प्रणाली अच्छी नहीं थी। इसलिए उन्हें बुधवार को मैंने रिलीव कर दिया। सीएमओ ने आश्वासन दिया है कि वह शीघ्र ही एक अन्य बाल रोग विशेषज्ञ को नियुक्त करेंगे।

सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने बताया कि महिला अस्पताल की एसआईसी का पत्र मिला है। डॉ. देवकुलियार चौरीचौरा में ज्वाइन करेंगे। उनका वेतन वहीं से बनता है। वहां पीडियाट्रिक आईसीयू है। वहां के पीआईसीयू के इंचार्ज होंगे।
 
सीडीओ व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट देखेंगे कर्मचारियों का काम
महिला अस्पताल में चल रहा विवाद डीएम विजय किरन आनंद तक पहुंच गया है। उन्होंने सीडीओ व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की कमेटी बनाकर महिला अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों पर नजर रखने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारी देखेंगे कि डॉक्टर व कर्मचारी अपने कार्य का निर्वहन ठीक से कर रहे हैं या नहीं। डीएम ने एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।

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