लखनऊ/ गुरुवार, २५ नवंबर/ चुनावी समय में बिजली उपभोक्ताओं ने लगाई बिल माफी की आस, लेसा के 625 करोड़ फंसे

नरेश शर्मा, लखनऊ। यूपी विधान सभा 2022 चुनाव की सरगर्मी के बीच राजनीतिक दलों की ओर से लुभावने वादे किए जा रहे हैं। इन्हीं वादों में से एक वादा घरेलू बिजली बिल माफ करने का है, जिसने लेसा को परेशानी में डाल दिया है। बिल माफी की उम्मीद में बकायेदारों द्वारा भुगतान रोक दिए जाने से लेसा के 625 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इससे अफसर भी परेशान हैं। लेसा में कुल 3,75,392 बकायेदारों पर 670 करोड़ रुपये की रकम बाकी थी। लाख कोशिशों के बाद इंजीनियर लगभग एक माह में 22 नवंबर तक कुल 79,245 बकायेदारों से सिर्फ 45 करोड़ रुपये वसूल पाए। इससे अब भी 2,96,119 बकायेदारों के पास 625 करोड़ रुपये फंसे हैं।

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...तो बकायेदारों को होगा 186 करोड़ का नुकसान
लेसा के अभियंताओं का कहना कि पुराने घरेलू बिल माफ करने के सियासी वादे से लखनऊ के बकायेदारों को 186 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होगा। ये बकायेदार ओटीएस में पुराना बिल जमा कर देते तो इनका 186 करोड़ से अधिक का सरचार्ज माफ हो जाता। यदि, वादे के मुताबिक पुराने बिल माफ न हुए तो आगे चलकर उनको बिल के साथ सरचार्ज की रकम का भी भुगतान करना पड़ेगा।
ग्रामीण उपभोक्ता भी आस लगाए बैठे
ग्रामीण बकायेदार उपभोक्ता भी विधानसभा चुनाव के बाद उनका पुराना बिल माफ होने की आस लगाए बैठे हैं। इससे पुराने बिल का भुगतान नहीं कर रहे हैं। मलिहाबाद, माल व रहीमाबाद में ऐसे 95 फीसदी, जबकि मोहनलालगंज, गोसाईंगंज, निगोहां व नगराम में 92 फीसदी बकायेदार हैं।
कहां, कितना बिल बाकी
खंड बकायेदार बकाया (करोड़ में)
सेस प्रथम 33,301 53.59
सेस द्वितीय 49,393 98.10
सेस तृतीय 52,986 45.40
सेस चतुर्थ 48,043 61.91
बीकेटी 34,596 21.86
चिनहट 21,499 37.19
बिल माफी के पोस्टर से पड़ा असर
लेसा के मुख्य अभियंता अनिल कुमार तिवारी ने बताया कि एक राजनीतिक पार्टी के प्रत्याशियों की ओर से पुराने घरेलू बिजली बिल माफ करने के पोस्टर लगाए जाने से एकमुश्त समाधान योजना के तहत राजस्व वसूली में असर पड़ा है। इलाकाई इंजीनियरों की कोशिश के बाद भी अधिकतर बकायेदार पुराना बिल जमा करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

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