अलीगढ़/ बुधवार, १८ मई/ अलीगढ़ : मूसा डाकरी संग्रहालय में दुर्लभ वस्तुओं से नहीं हटतीं नजरें

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में दो संग्रहालय हैं, जहां दुर्लभ वस्तुएं और पांडुलिपियां हैं। संग्रहालय आने वाले लोगों की नजरें इन दुर्लभ वस्तुओं पर ऐसे टिकती है कि हटती नहीं। शिला लेख, स्तूप, खुदाई में मिले सदियों पुराने बर्तन, खिलौने दोनों संग्रहालय के आकर्षण का केंद्र हैं। इन दोनों संग्रहालय का जिक्र इसलिए करना पड़ रहा है, क्योंकि बुधवार को विश्व संग्रहालय दिवस है। संग्रहालय में आने वाले विजिटर संग्रहालय की खूबसूरती विजिटर बुक में अपने शब्दों के जरिये बयां करते हैं।

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मूसा डाकरी में दुर्लभ शिला लेख, स्तूप
एएमयू के मूसा डाकरी संग्रहालय में दुर्लभ शिला लेख, स्तूप हैं। संग्रहालय में सदियों पुराने शिला लेख, स्तूप, मूर्तियां हैं। एटा जिले के जखेड़ा, अतरंजी खेड़ा में एएमयू के पुरातत्व विभाग ने खुदाई कराई थी, जहां मिट्टी के दुर्लभ बर्तन, खिलौने आदि मिले थे, जो संग्रहालय में संरक्षित हैं। इनमें ओरिजनल विक्टोरिया गेट घड़ी, 9-10वीं सदी के चारों दिशाओं का स्तूप, द्वार सजावट, 1-2वीं सदी की गौतम बुद्ध की बैठने की मुद्रा की प्रतिमा, जो खंडित है। 11-12वीं सदी का सूर्य, आदमकद बुद्ध प्रतिमा, लकड़ी का पानी वाला जहाज आदि शामिल हैं। संग्रहालय में जंगल से लेकर गांव की जीवनशैली को भी दर्शाया गया है।
एमए लाइब्रेरी में दुर्लभ पांडुलिपियां
एएमयू के मौलाना आजाद लाइब्रेरी के एक हॉल में 14 लाख से ज्यादा पुस्तकें और दुर्लभ पांडुलिपियां हैं। इस संग्रहालय में उर्दू, फारसी, संस्कृत और अरबी भाषाओं में दुर्लभ पांडुलिपियां संरक्षित हैं। कुरान शरीफ की एक प्रति 14 सौ साल पुरानी है। हजरत अली के हाथों से चर्म पत्र पर लिखी कुरान की आयतें हैं। अबुल फैज द्वारा श्रीमद् भागवत गीता का फारसी अनुवाद है।
मूसा डाकरी संग्रहालय में सूर्य।
मूसा डाकरी संग्रहालय में सूर्य। - फोटो : CITY OFFICE


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